देश के सांसद/विधायक की
राजनीति कोई रिटायरमेंट प्लान नहीं,रिटायरमेंट बाद पेंशन,भत्ता बंद हो।
शहाबुद्दीनअहमद/बेतिया। Bihar News Hub
देश के सांसदऔर विधायक जनप्रतिनिधि होते हैं,यह कोई सरकारी कर्मचारी नहीं है कि इनका रिटायरमेंट प्लान होता है,इसकेअंतर्गत काम करते हैं,इनकी राजनीति कोई रिटायरमेंट प्लान नहीं,बल्कि समाज सेवा करना होता है,
राजनीति सेवा है या नौकरी?
अगर सेवा है तो वेतन और पेंशन क्यों ?अगर नहीं तो यदि नौकरी है तो इसके लिए कोई योग्यताऔर परीक्षा क्यों नहीं होती।केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार इन लोगों को रिटायरमेंट भत्ता,पेंशन एवंअन्य भत्ते का भुगतान प्रतिमाह करती है,जो किसी तरह से विधिसम्मत नहीं।इस पर पाबंदी लगनी चाहिए।सभी सांसद/विधायक जनप्रतिनिधि होते हैं,उनको जनता की सेवा करने के लिए जनता चुनती है,अपने क्षेत्र की जनता के समस्याओं का निदान करने,क्षेत्र का चतुर्दिक विकास करने के लिए इनको चुनकर लोक सभा/राज्यसभा,विधान सभा, विधान परिषद भेजती है। केंद्र सरकार और राज्य सरकार के द्वारा भी इन सांसदों,विधायकों को प्रतिवर्षअपने क्षेत्र के विकास करने हेतु करोड़ की राशि आवंटित होती है,मगर ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ होती नजर आती है।क्षेत्र के विकास के नाम पर लूटने का काम किया जाता है,आवंटित राशि का 20 -30% कमीशन के रूप में काम कराने वाले से लिया जाता है,तभी जाकर क्षेत्र में काम कराने के लिए अभिकर्ताओं को दिया जाता है,निर्माण कार्य भी ऐसा होता है कि1साल में ही टूट जाता है,गुणवत्तापूर्ण कार्य भी नहीं होता है,जिसके कारण अवधि के पूर्वी ही टूट-फूट कर बर्बाद हो जाता है,उसका नाम व निशान भी मिट जाता है। देश के कई सांसद,विधायक ऐसे भी हैं जिनको प्रतिवर्ष क्षेत्र के विकास के लिए करोड़ों की राशिआवंटित होती है,मगर खर्च नहीं कर पाते हैं,उनको जमा करना पड़ता है,इसका कई उदाहरण सामने आए हैं।
इन सांसदों/विधायकों को मिलने वाली पेंशन,अन्य भत्ते की राशि कोअभिलंब बंद होना चाहिए।यह लोग किसी एंगल से पेंशन एवं अन्य भत्ते के हकदार नहीं है।यह लोग
सरकारी खजाने को लूट रहे हैं।सांसदऔर विधायक का मतलब सिर्फ जनता की सेवा करना होता है ना कि पूरी जिंदगी भर सरकारी खजाने पर पलना होता है।अभी-अभी पड़ोसी देश श्रीलंका की सरकार ने एक ऐसा क्रांतिकारी कदम उठाया है,जिसकी गूंजअब पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है,वहां के सांसदों को रिटायर्ड होने के बाद मिलने वाली मोटी पेंशन कोअब पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है।वहां के राष्ट्रपति के द्वारा 49 साल पुरानी इस कानून को भारी बहुमत के साथ जड़ से उखाड़ फेंका है। इस फैसले का सीधाऔर साफ संदेश है किअब राजनीति मेंआने का मतलब सिर्फ जनता की सेवा करना ही होगा ना कि पूरी जिंदगी सरकारी खजाने को लूटना होगा।श्रीलंका का यह फैसला उन सभी देशों के लिए एक मिसाल है,जहां नेताओं की सुविधा पर खरबो खरब रुपया प्रतिमाह खर्च होते हैं,जबकिआम जनता बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष करती है,साथ ही सरकारी कर्मचारी पैसे पैसे के मोहताज रहते हैं। सांसदों और विधायकों की पेंशन औरआलीशान सुविधाओं को तुरंत बंद कर देना चाहिए
ताकि देश का विकास हो सके। सांसद और विधायक के लिए पेंशन शब्द को जड़ से हटा देना होगा,तभी देश का विकास होगा,जिस तरह से श्रीलंका सरकार ने सांसदों विधायकों को पेंशन को बंद कर दिया है,इस तरह भारत सरकार को भी ऐसा कदम उठाना चाहिए। विभिन्न सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार संवाददाता को पता चला है कि भारत देश पर खरबो खरब रुपए का कर्ज दूसरे देशों का है,और यह देश सिर्फ कर्ज के दहाने पर खड़ा हुआ है,देश कीआर्थिक हस्थिति बिल्कुल ही चरमरा गई है,महंगाई,बेरोजगारी, पलायन चरम सीमा पर है, आर्थिक स्थिति डांवाडोल है।
देश के प्रधानमंत्री,गृह मंत्री, वित्त मंत्री,देश के लोगों को महज धोखा दे रहे हैं,देश के प्रति नागरिक पर 35 हजार रुपया का कर्ज़ चल रहा है, जो बच्चाआज देश में पैदा होगा,उसपर भी 35 हजार का कर्ज़ का बोझ है,देश आज कर्ज मेंडूबा हुआ है, मगर यह नेतागण,मंत्री, सांसद,विधायक देश को लूट रहे हैं,कर्ज के गड्ढे में धकेल रहे हैं। देश के इन मंत्रियों, सांसदों,विधायकों पर प्रतिमाह खरबोखरब रुपया खर्च हो रहा है,जो दूसरे देशों से कर्ज लेकर इसको निभाया जा रहा है।देश के सारी संपत्ति को नरेंद्र मोदी के सरकार ने बेच दिया है,देश की संपत्ति को बेचकर गिरवी रखकर ऐश किया जा रहा है।
देश की गरीब जनता,सरकारी कर्मी वेतन और पेंशन के लिए तरस रहे हैं,मंगाई चरम सीमा पर पहुंच गई है।विदेश औरअन्य वित्तीय संस्थानों से कर्ज से चरमराई हुई स्थिति में देश को चलाया जा रहा है। प्रधानमंत्री,गृह मंत्री एवंअन्य मंत्रियों पर प्रतिदिन करोड़ों रुपए का खर्चआ रहा है,मगर इन लोगों के मेंटेनेंस में, ठाठबाठ में कोई कमी नजर नहींआ रही है।देश का विकास कोसों दूर है,केवल जुमलाबाजी करके देश की जनता को गुमराह किया जा रहा है।नरेंद्र मोदी के द्वारा विदेश का झूठा दौरा करके करोड़ों करोड़ रुपया खर्च किया जा रहा है,इस देश को कोई फायदा नहीं पहुंच रहा है,सिर्फ झूठीशान को दिखाया जा रहा है,इससे देश पर कर्ज बढ़ रहा है।
















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