बाइक चोरों का बढ़ता आतंक, शिक्षक तक भयभीत
सुरक्षा के नाम पर सिर्फ चेतावनी, ज़िम्मेदारी से बच रहे शॉपिंग मॉल
बेतिया।
पद्मा नगर, बेतिया निवासी सोहराब शैख, जो पेशे से फिजिक्स के शिक्षक हैं, से कल रात चेक पोस्ट, गणेश टी स्टाल के पास हुई मुलाकात ने शहर में बढ़ती बाइक चोरी की घटनाओं की गंभीर सच्चाई को उजागर कर दिया।
सोहराब शैख अपनी बाइक में कंपनी लॉक के अलावा अतिरिक्त चैन और ताला लगाए हुए थे। जब उनसे इसके पीछे की वजह पूछी गई, तो उन्होंने कहा—
हम शिक्षक हैं सर, बड़ी मुश्किल से यह बाइक खरीदी है। अगर खुद हिफाज़त नहीं करेंगे तो कौन करेगा?
तीन साल पहले मेरी बाइक बेतिया टाउन थाना के नजदीक से चोरी हो गई थी, जो आज तक नहीं मिली। इंश्योरेंस से कुछ पैसे ज़रूर मिले, लेकिन नुकसान और डर आज भी बना हुआ है।
उन्होंने आगे सवाल उठाते हुए कहा—
जब थाना के पास से बाइक चोरी हो सकती है, तो फिर शहर में कौन-सी जगह सुरक्षित है?
यह केवल सोहराब शैख की चिंता नहीं, बल्कि आज हर बाइक मालिक की साझा पीड़ा बन चुकी है। शहर में बाइक चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हैरानी की बात यह है कि शॉपिंग मॉल, मार्केट और भीड़भाड़ वाले इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों के बावजूद चोर बेखौफ वारदात को अंजाम दे रहे हैं।
अधिकांश शॉपिंग मॉल के बाहर पहले से ही A4 साइज के नोटिस लगे रहते हैं—
“अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करें।
यानी सीसीटीवी होने के बावजूद मॉल प्रबंधन किसी भी जिम्मेदारी से साफ इनकार करता है। कैमरे केवल देखने भर के रह गए हैं, न निगरानी है, न जवाबदेही।
इस स्थिति में बड़ा सवाल यह उठता है कि—
क्या शॉपिंग मॉल और व्यावसायिक संस्थानों की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती कि वे अपने ग्राहकों के वाहनों और सामान की सुरक्षा सुनिश्चित करें?
यदि सुरक्षा की कोई जिम्मेदारी नहीं, तो फिर सीसीटीवी कैमरे लगाने का औचित्य क्या है?
बाइक चोरी की बढ़ती घटनाएं प्रशासन, पुलिस और मॉल प्रबंधन—तीनों के लिए गंभीर चेतावनी हैं। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आम नागरिक का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है।
अब ज़रूरत है कि
पार्किंग की जवाबदेही तय हो,
संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई हो,
और बाइक चोरों के खिलाफ कड़ी पुलिस कार्रवाई की जाए।
वरना सोहराब शैख जैसे जिम्मेदार नागरिकों का डर पूरे समाज के लिए खतरे की घंटी बन जाएगा।
















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