बेतिया में न्याय का महा कुंभ राष्ट्रीय लोक अदालत ने खोले त्वरित न्याय के द्वार

Spread the love

बेतिया में न्याय का महाकुंभ: राष्ट्रीय लोक अदालत ने खोले त्वरित न्याय के द्वार, हजारों मामलों के समाधान की उम्मीद

बेतिया व्यवहार न्यायालय परिसर आज न्याय, विश्वास और समाधान का सशक्त केंद्र बनकर उभरा, जब राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया। सुबह से ही न्यायालय परिसर में लोगों की चहल-पहल, उम्मीदों की चमक और समाधान की आस साफ नजर आ रही थी। कार्यक्रम की शुरुआत जिला प्रधान न्यायाधीश, विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव, जिला अधिकारी, पुलिस अधीक्षक सहित अन्य न्यायिक पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर की। दीप की लौ के साथ ही न्याय के उस संकल्प को मजबूती मिली, जिसके तहत आमजन को सुलभ, सस्ता और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना लोक अदालत का मूल उद्देश्य है।

इस अवसर पर प्रधान न्यायाधीश ने लोक अदालत की महत्ता को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 2025 की यह अंतिम राष्ट्रीय लोक अदालत है, जो न्यायिक प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लोक अदालत में इस बार यातायात चालान से जुड़े मामलों के निपटारे का भी विशेष प्रावधान किया गया है, जिससे आम नागरिकों को राहत मिलेगी और न्यायालयों पर लंबित मामलों का बोझ भी कम होगा। उन्होंने कहा कि लोक अदालत आपसी सहमति, संवाद और समाधान का मंच है, जहां विवाद नहीं बल्कि समझौते के जरिए न्याय की स्थापना होती है।

कार्यक्रम के दौरान यह संदेश बार-बार दोहराया गया कि लोक अदालत केवल मुकदमों के निपटारे का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज में शांति, सहयोग और विश्वास को मजबूत करने की एक प्रभावी व्यवस्था है। बैंक लोन से जुड़े विवाद, बिजली बिल के मामले, बीमा दावे, पारिवारिक विवाद, चेक बाउंस, भूमि विवाद और विभिन्न विभागों से संबंधित मामलों का त्वरित समाधान लोक अदालत के माध्यम से संभव है। यहां फैसले आपसी सहमति से होते हैं, जिनमें न तो लंबी कानूनी प्रक्रिया होती है और न ही अतिरिक्त खर्च का बोझ पड़ता है।

बेतिया व्यवहार न्यायालय परिसर में लगाए गए विभिन्न बैंकों के विशेष काउंटर लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने रहे। इन काउंटरों पर बैंक अधिकारियों और विधिक विशेषज्ञों की मौजूदगी में पुराने ऋण विवादों, समझौता योग्य मामलों और बकाया भुगतान से जुड़े प्रकरणों का मौके पर ही समाधान किया गया। सुबह से ही इन काउंटरों पर लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलीं, जो इस बात का प्रमाण थीं कि लोक अदालत पर आमजन का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।

जिला अधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि लोक अदालत प्रशासन और न्यायपालिका के बीच समन्वय का सशक्त उदाहरण है। इससे न केवल आम लोगों को राहत मिलती है, बल्कि सरकारी तंत्र की कार्यक्षमता भी बढ़ती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे लोक अदालत जैसे मंचों का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और आपसी सहमति से विवादों का समाधान कर सामाजिक सौहार्द को मजबूत करें।

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि यातायात चालान से जुड़े मामलों को लोक अदालत में शामिल करना एक सराहनीय पहल है। इससे न केवल लोगों को आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि यातायात नियमों के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों का त्वरित निपटारा पुलिस और न्यायालय दोनों के लिए लाभकारी है और इससे आम जनता का समय भी बचता है।

कार्यक्रम के दौरान विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव ने लोक अदालत की कार्यप्रणाली पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि लोक अदालत के फैसले अंतिम होते हैं और इनके खिलाफ अपील की कोई व्यवस्था नहीं होती, जिससे विवाद का स्थायी समाधान सुनिश्चित होता है। यही कारण है कि लोक अदालत को न्याय का सरल और प्रभावी माध्यम माना जाता है।

दिन भर चले इस आयोजन में न्यायिक पदाधिकारियों, अधिवक्ताओं, बैंक अधिकारियों, प्रशासनिक कर्मियों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। न्यायालय परिसर में बने अलग-अलग कक्षों में मामलों की सुनवाई शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में की गई। कई ऐसे परिवार भी नजर आए, जिनके वर्षों पुराने विवाद आज आपसी समझौते के साथ समाप्त हुए और उनके चेहरों पर संतोष की झलक साफ दिखाई दी।

लोक अदालत का यह आयोजन न केवल मामलों के निपटारे तक सीमित रहा, बल्कि यह समाज को यह संदेश भी देता नजर आया कि संवाद और सहमति के रास्ते पर चलकर किसी भी विवाद का समाधान संभव है। यहां न्याय कठोर नहीं, बल्कि मानवीय रूप में सामने आता है, जहां कानून के साथ-साथ संवेदनशीलता को भी महत्व दिया जाता है।

बेतिया की इस राष्ट्रीय लोक अदालत ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जब न्यायपालिका, प्रशासन और समाज मिलकर कार्य करते हैं, तो न्याय का रास्ता सरल और प्रभावी बन जाता है। वर्ष 2025 की अंतिम लोक अदालत के रूप में यह आयोजन न केवल रिकॉर्ड समाधान की दिशा में अग्रसर दिखा, बल्कि आने वाले समय के लिए भी एक सकारात्मक संदेश छोड़ गया। लोक अदालत के माध्यम से लोगों को मिली राहत, संतोष और विश्वास ही इसकी सबसे बड़ी सफलता है, जो न्याय के इस महाकुंभ को यादगार बनाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *