मनरेगा योजना कागज़ों में सिमटी, धरातल पर काम शून्य। फर्जी हाजिरी के सहारे लाखों की निकासी का आरोप**

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मनरेगा योजना कागज़ों में सिमटी, धरातल पर काम शून्य*।

फर्जी हाजिरी के सहारे लाखों की निकासी का आरोप**

अररिया।
जिला अररिया के प्रखंड कुर्साकाटा अंतर्गत पंचायत जागीर परासी में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) एक बार फिर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में मनरेगा योजना सिर्फ कागज़ों पर संचालित हो रही है, जबकि जमीनी स्तर पर किसी प्रकार का कार्य दिखाई नहीं देता।

ताजा मामला पंचायत के वार्ड नंबर 06 का है, जहां दो अलग-अलग कार्यस्थलों पर भारी पैमाने पर फर्जी मजदूरों की हाजिरी लगाकर सरकारी राशि की निकासी की जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार एक कार्यस्थल पर 54 मजदूरों और दूसरे कार्यस्थल पर 57 मजदूरों की फर्जी हाजिरी दर्ज की जा रही है, जबकि धरातल पर काम पूरी तरह शून्य है।

ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि पंचायत में लंबे समय से मनरेगा योजना में अनियमितताएं होती आ रही हैं। उनका कहना है कि पंचायत के मुखिया और पंचायत रोजगार सेवक के बीच कथित मिलीभगत के कारण पंचायत का विकास अवरुद्ध हो रहा है।

परिवार से जुड़ी मेठ पर उठे सवाल ।

ग्रामीणों द्वारा बताए गए पहले कार्य का विवरण इस प्रकार है—
वर्क कोड: 0541005003/FP/20382167
एमएसआर संख्या: 20768
कार्य का नाम: जागीर परासी पंचायत, वार्ड संख्या 06 में मेन रोड से सोफी के खेत तक फसल सुरक्षा तटबंध निर्माण कार्य।

इस कार्य में मेठ के रूप में पूनम देवी का नाम दर्ज है, जिनके बारे में स्थानीय लोगों का दावा है कि वे मुखिया के ही परिवार की सदस्य हैं। ग्रामीणों के अनुसार इस एक ही कार्य में दोनों ओर मिलाकर प्रतिदिन करीब 111 मजदूरों की फर्जी हाजिरी एनएमएस ऐप पर दर्ज की जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी-कभार केवल सुबह और शाम टेंपो से कुछ महिलाओं को लाकर कार्यस्थल पर खड़ा किया जाता है, उनके हाथों में कुदाल पकड़ाकर फोटो और वीडियो बना लिया जाता है, जबकि मौके पर एक टोकरी मिट्टी तक नहीं दिखती। इसके बावजूद नियमित रूप से मजदूरों की उपस्थिति दर्ज कर ली जाती है।

जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि मनरेगा जैसी महत्वाकांक्षी योजना, जो ग्रामीणों को सौ दिन के रोजगार की गारंटी देती है, उसमें इस तरह का भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी जनप्रतिनिधियों, पंचायत कर्मियों व संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे इस मुद्दे को लेकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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