दयालु दाता, कहावत है क्या लेकर आए हो और क्या लेकर जाओगे,

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दयालु दाता,
कहावत है क्या लेकर आए हो और क्या लेकर जाओगे,
इस प्राप्त दुर्लभ शरीर के अध्ययन पश्चात पाया गया कि विधाता सबसे बड़े दयालु दाता है जन्म से हमारे शरीर में अनमोल अंगों का सृजन कर पवित्र धरती माता की गोद में उतारा है जैसे ब्रेन आंखें हृदय लीवर किडनी रक्त इत्यादि अनमोल चीजें किसी पेड़ पौधे पर नहीं मिलते हैं। यह सब भुल भुलाकर
आज इंसान अपने स्वार्थ में इतना डूब चुका है कि वह यह भूल गया कि जिस धरती पर वह जी रहा है, वही उसकी असली पहचान और जीवन का आधार है। हमारे शास्त्रों और विद्वानों ने हमेशा से धरती को धरती माता” या “धरती पिता कहकर सम्मान दिया है, क्योंकि यही हमें जीवन के लिए आवश्यक सभी संसाधन प्रदान करती है—जैसे अन्न, जल, वायु, पेड़-पौधे और खनिज।
लेकिन वर्तमान समय में इंसान अपनी जरूरतों और लालच के चलते प्रकृति का लगातार दोहन कर रहा है। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, जल और वायु प्रदूषण, और प्राकृतिक संसाधनों का दुरुपयोग—ये सब हमारी धरती को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसका असर न केवल पर्यावरण पर बल्कि मानव जीवन पर भी साफ दिखाई देने लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते हम नहीं संभले, तो आने वाले समय में स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने से जलवायु परिवर्तन, बीमारियों में वृद्धि और जीवन स्तर में गिरावट जैसी समस्याएं बढ़ती जाएंगी।
ऐसे समय में जरूरत है कि हम सब मिलकर भाईचारा और जिम्मेदारी का परिचय दें। हमें आपसी सहयोग से पर्यावरण की रक्षा करनी होगी—ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाना, जल और ऊर्जा का सही उपयोग करना, और प्रदूषण को कम करने के प्रयास करना बेहद जरूरी है।
यह केवल सरकार या किसी एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपनी धरती के प्रति सजग रहे और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित और स्वस्थ वातावरण छोड़े।
धरती हमें जीवन देती है, अब हमारी बारी है कि हम उसकी रक्षा करें।

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